मेरे वादे श्मशान वैराग न संत न महान हुआ।
मीठे पेड़ की जड़े चबाई डाल बैठा वो काटा।
जीताए उसे ही मारा सब्जबाग दिखाता गया।
बाहुबली माफिया साथ चुनाव मेरा धर्म हुआ।
भगवान से नही डरा भगवान को डराता गया।
भगवान टार्गेट कर चुनावी प्रयोग करता गया।
हिन्दू न मुसलमान न शरीफ न बेईमान हुआ।
वक्त का तकाजा है मेरा चुनाव मेरा धर्म हुआ।
जब चाहा सिर चढ़ाया या बेइज्जत कर दिया।
जिसे परिभाषित किया वो लोकतंत्र मेरा हुआ।
राष्ट्रीय संपति मेरी थी जनसंपति हथिया गया।
सत्ता मेरे लिए मेरे द्वारा चुनाव मेरा धर्म हुआ।
संतो बाहुबली का सरगना कोई डर नही रहा।
बीस टका नही चाहता मैं जड़े जमाता गया।
वक्त शांत रहा तो आंधी तूफान सुनामी हुआ।
लाए इस कगार पर फैसला दो टके का हुआ।
दो टका ज्यादा तो राजा नही तो फकीर हुआ।
फैसला भाग्य पर हुआ चुनाव मेरा धर्म हुआ।
#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित

