पार्थ सारथी's image
Share0 Bookmarks 60131 Reads0 Likes


धिकधिक ये पौरुष नपुंसक हो रहा

पार्थ कठिन घड़ी में तुझे क्या हुआ


समक्ष युद्ध में न पितृ भ्रात न गुरु है

सामने खड़ा युद्ध में बस तेरा शत्रु है


तू धर्म मे भटके तू कर्ता नही रथी है

विश्वरथ का बस काल ही सारथी है


 वे पहले से मरे हुए तू किसे मारता

आत्मा अमर है कोई न मार सकता

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts