सृष्टि के आदि में पितामह ने ब्रह्मांड रचा।
पशु-पक्षी मानव एवं जंघम-स्थावर रचे।
सृष्टि में चंहुओर मौन सर्जन में कमी रही।
आदिशक्ति से श्वेतवर्णा नारी उत्पन्न हुई।
देवी सरस्वती श्वेतकमल पर विराज रही।
वीणा वर मुद्रा कर में पुस्तक माला धरे।
वीणा के मधुर नाद से राग रागिनि प्रसरे।
जलधारा पवन चलती सृष्टि में ध्वनि करे।
वाणी संगीत कला की अधिष्ठात्री देवी।
शब्द रस का संचार देवी सरस्वती करे।
ब्रह्म विद्या की देवी भगवती वागीश्वरी।
शारदा वीणावादिनी को हम नमन करे।
#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित

