धरा कांप उठी लंकासंग्राम रचा गया।
दशानन आज तापस से लाचार हुआ।
युद्ध में किया कुंभकर्ण का आव्हान।
युद्ध मे समक्ष है श्रीराम कृपानिधान।
जगाकर उसे सूरा मांस भेंट चढ़ाया।
कुंभकर्ण कहे क्या कारण हो आया।
कौन यहां मरने आया कह दशानन।
लंका में समक्ष श्रीराम कृपानिधान।
राष्ट्रआन खतरे में लंका में सैना आई।
कनककोट यह सिंधुसीमा लांघ आई।
भाई सहाय करो महायोद्धा हुए खेत।
युद्ध मे ललकारे श्रीराम कृपानिकेत।
भगिनीवश साक्षात जगदंबा हर लाया।
राजा होकर नारी सन्मान भुला आया।
साधु बन सीता हरे गया राजधर्म भुल।
कौन बचाए लड़ते श्रीराम बल अतुल।
राक्षस कुल कुम्भकर्ण न झुके रण में।
मारने मारने को आज राजधर्म पुकारे।
आज युद्ध होगा जिसका नही गुमान।
समक्ष युद्ध में जो श्रीराम कृपानिधान।
#सुरेश गुप्ता
स्वरचित

