खतरे की घंटी's image
Poetry1 min read

खतरे की घंटी

suresh kumar guptasuresh kumar gupta May 23, 2023
Share0 Bookmarks 58048 Reads0 Likes
विकास की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे।
प्रकृति का दोहन अपव्यय कर रहे।
धरती पर एक ही जीवनदाता जल।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

नहर खेत पर नहाते बीता बचपन।
हरियाली बारिश खुशहाल जीवन।
पूल टब में बर्बाद करते जाते जल।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

गर्मी बढ़ती जल की हुई क़िल्लत।
जल समाधान एक करते संरक्षण।
मुहाने पर आ खड़े है जल-संकट।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts