कण कण में कृष्ण's image
96K

कण कण में कृष्ण


मदहोश निशा की अद्भुत चांदनी में 
निधिवन में अवतरित हो रास रमाते 
श्याम मुरली पर जब धुन छेड जाते
कण कण में कृष्ण जीवंत हो जाते

स्वामी हरिदास वृन्दावनधाम पधारे
ध्यान में सदा जुगल किशोर बिराजे
वृन्दावन की गलियो में स्वामी गाते
कण कण में कृष्ण जीवंत हो जाते

यमुना करीब के रमणीक कुंज में
नित्यलीला प्रेम रसास्वादन करते 
समाधि में सदा विग्रह दर्शन पाते 
कणकण में कृष्ण जीवंत हो जाते

श्यामा-कुंजविहारी की सहज जोडी
अपार रस सिंधु ह्रदय मे रमाये रहते 
कभी रसावेश मे मधुर वाणी से गाते 
कण कण में कृष्ण जीवंत हो जाते

दिनभर बंदर पँछी उछलकूद मचाते 
शाम ढले लौटते रात नही रुक पाते
Read More! Earn More! Learn More!