तलाशे रास्ता ग्राहक हाट में खड़ा है।
यहां चाल कुछ है तो बेहाल कुछ है।
कहीं लेबल कुछ कहीं माल कुछ है।
दुकान किसी की खोल कोई बैठा है।
छप्पन से चले तोड़ छब्बीस निकला।
कैसे पीछे रहते अड़तीस खड़ा करा।
जनता चकराती है नम्बर के फेर में।
सांठ गांठ छतीस में अटकी पड़ी है।
कहीं खड़ा हजुम एक हो जाने को।
कहीं अकेला हजूम बनाने है चला।
वक्त की बात बिल्ली राह तलाशती।
कहीं चूहों की सैना रही ललकारती।
मांगते है सिक्का वे आज टॉस करे।
कौन खीँचे लँगोट कौन कंगाल करे।
यहां हर चाल में जाल नजर आता।
दाल में काला कभी काली दाल रहे।
