मन अच्छे या बुरे विचार देता है
संत मिलन शुद्ध संस्कार देता है
शुद्ध खाते सोचते और देखते है
वे ही ब्रह्मांड में यथार्थ देखते है
कान नाक आंख अलग होते है
एक सा ही सूंघते सुनते देखते है
मगर मानव बुद्धि की क्षमता से
विश्लेषण अलग अलग करते है
कहते कचरा दिमाग मे होता है
मन के रास्ते दिमाग पुष्ट होता है
क्या लाया क्या लेकर जाना है
शुद्ध मन जीवन पावन करता है
सत्य को शुद्ध बुद्धि से देख पाएंगे
तर्क भटकाव की राह पे ले जाएंगे
कुछ न छोडना तुम तर्कों के सहारे
जाना हो चीन जापान छोड़ आएंगे
अच्छे से पत्थर बन गए तो क्या
कहीं मंदिरों में ही बंद रह जाओगे
थोड़े जी लो मगर फूलों की तरह
जमाने में दूर तक महकते जाओगे
#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित


