धर्म प्रेम की भाषा's image
Poetry1 min read

धर्म प्रेम की भाषा

suresh kumar guptasuresh kumar gupta March 12, 2023
Share0 Bookmarks 61804 Reads0 Likes

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई 
किसी मे फर्क न कर पाया
उठता बैठता सब के साथ
जैसा मुझे धर्म ने सिखाया

दिल से दिल मे जगह बना 
जो मिला आत्मसात किया
मन से हिन्दू मैं तन से हिन्दू 
हिंदुत्व मेरे रोम रोम में बसा

मंदिर जाता मैं देरासर गया
गुरुद्वारा मजार में हो आया

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts