खेत मे घुसते तो पशु पक्षी खौफ खाते थे।
किसान खड़ा कर गया हां वो बिजूका था।
उस उपस्थिति से सब मे ड़र का सबब था।
उसका साम्राज्य उसका अपना वजूद था।

शातिर जानवरो की नजर से बच न सका।
वह तो सदा निशब्द निश्छल खड़ा ही रहा।
कौआ सिर पर बैठ पतन दावत देता गया।
फिर तो कोई भी बेलगाम अंदर आ गया।

अब न किसी को डर न फिकर हावी था।
वह नादान बेआवाज़ बेफिक्र खड़ा रहा।
बिजूका खड़ा किया किसान बेफिक्र था।
मगर बेजान खौफ से तो खेत लुटता गया।

#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित