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बलिदान की घड़ी

suresh kumar guptasuresh kumar gupta April 11, 2023
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बात निकली है तो दूर तलक जाएगी
सम्भव नही हवाएं तूफान रोक पाएगी

दबाओगे महक को छुप नही पाएगी
मौन रहोगे तो खामोशी बोल जाएगी

आग छुपाने का दुःसाहस तो कर बैठे
वक्त गुजरा आग दावानल हो जाएगी

जिसकी ओट में आप छुपकर बैठे थे
वक्त के साथ दीवार धराशायी हो गयी

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