साम्राज्य था जनता के दिलों पर राज का
वे सत्ता हथिया गए अपना शौक मानकर
डुगडुगी पीटी जाती गली गली शोर हुआ
निकल पड़े ढूंढने साम्राज्य चोरी हो गया
दबे मुंह अफवाह उड़ी चूहे ज्यादा हो गए
कद क्या बढ़ा आज साम्राज्य उठा ले गए
हरकारे निकले पर कहीं खबर नही मिली
महाराज नींद में रहे चूहे साम्राज्य ले भागे
बैंक पीसीयू संस्थानों में छेद कुतर जाते
उठाए जो आवाज़ ये सवाल कुतर जाते
क्या अब चूहे सत्ता के बन छाते जा रहे
आज नौकरी पैसा और जेब कुतर जाते
लोकतंत्र और सविंधान के पन्ने कुतरते
बच्चों के पेपर शिक्षा भविष्य कुतर जाते
क्या चूहों का कद भी इस कदर बढ़ गया
वे चाहेंगे तो क्या साम्राज्य उनका हो गया
इतिहास में वाकया ऐसा कभी नही हुआ
वे कुतरते रहे और आज साम्राज्य ले उड़े


