अग्नि साक्षात देव उनकी स्तुति करते।
देवो के आह्वाक है अग्नि रत्नदाता है।
अग्नि की प्रशंसा ऋषि सर्वदा करते।
यज्ञ के पुरोहित वे यज्ञ में ऋत्विज है।
अग्नि हवि देवों की ओर ले जाता है।
अग्नि देवों को यज्ञ में लेकर आता है।
दिन-ब-दिन पोषण वीरों सा यश देता।
बाह्य यज्ञ अम्बर में ये सर्वत्र व्याप्त है।
सत्य व्याप्त करते जो अंग शुद्ध करते।
देवों सहित पधारे दूरदर्शी सत्य पर है।
दिन-ब-दिन अंधकार में घिरी बुद्धि है।
श्रद्धा से नमन करे बुद्धि प्रकाशित करे।
यज्ञ की उज्ज्वल अग्नि ऋत से चमके।
घरों में रोशनी बढ़ाए पितृसम भला करें।
#सुरेश_गुप्ता
मौलिक

