पीछे मुड़ के मत देख
वहां तुझे जाना नहीं
कदम बढ़ा और आगे चल
तेरी मंजिल है आगे कहीं
माना के कुछ निरासे के गर्द हैं
जो आशा के उपर जम गईं हैं
जले हुए सपनों के राख तले
कुछ तमन्नाएं दब गईं हैं
उत्साह के फूंक से
उस राख को तू उड़ा दे
सो गए हैं जो ख्वाब
उनको फिर से जगा दे
कुछ आरजुएं पिघल के
आंखों से बह के
गालों पे जम गईं हैं
आंखों ने सींचा है होठों को मगर
प्यास बाकी रह गई हैं
फिर बहेंगी आंखों से खुशी की धाराएं
गम के निशां मिट जाएंगे
कुछ नए सपने बुन
कुछ नए ख्वाब देख
कुछ टूटेंगे
कुछ पूरे हो जाएंगे
एक नई राह चुन
एक नए सफर पे निकल
कुछ नए यार कुछ नए हमदर्द मिलेंगे
जो छोड़ गए सो छोड़ गए
सायद ए साथ निभाएंगे
पीछे मुड़ के मत देख
पीछे मुड़ के मत देख
~जेडी
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