क्यों तू आज हताश हे
क्यों तू आज निराश हे
क्यों तू आज खिन्न हे
क्यों तू आज परास्त हे

काट के देख तू नस तेरा
बहता उसमे रक्त हे
तू जिंदा हे, तू जिंदा हे
क्यों सोचे की मृत हे(२)

ए जो घनी रात हे
बस रात की ही तो बात हे
कल फिर सूरज आयेगा
नया सबेरा लाएगा

तू जश्न की औलाद हे
तू जश्न ही मनाएगा
जीत ही तेरा नसीब हे
तू जीत के दिखलाएगा(२)

इस वक्त से तू बात कर
खुद से तू मुलाकात कर
तेरे अंदर बसा जो डर हे
उस डर को तू आघात कर

वक्त जख्म दिया हे तो
मरहम भी बो लगाएगा
तेरे गहरे दर्द को 
साथ अपने ले जायेगा

तू जश्न की औलाद हे
तू जश्न ही मनाएगा
जीत ही तेरा नसीब हे
तू जीत के दिखलाएगा(२)

~जेडी
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