बादल पिघल के गिर रहा है
गरम जमीन से उठ रहा है धुआं

कोहरा ही कोहरा है वादियों में
मानो बरस रहा हो धुआं

राह तन्हा हे 
रास्ता अकेला हे
सिर्फ में हूं और हे ए धुआं

जल रहा हे घर किसका 
सपने बनगए हैं धुआं

दिल की आग सायद
बुझी नहीं अबतक
दिलसे भी उठ राहा हे धुआं