मौत को नग्न नाचते देखा 

आदमी दूर भागते देखा

 

देखा है जलते औरों को उम्र भर

आज उसे ख़ुद को, ताक़ते देखा


लाद कर ख़ुद को सोने-चाँदी से

फफककर भीख माँगते देखा


ज़िन्दगी को आते एक हिस्से में

मौत को मिल के बाँटते देखा


महफ़िलो में भूत, क़ब्रो पे देव नाचते देखा

झाँककर ख़ुद के ही गिरेबां में 

ख़ुद को ख़ुद से दूर भागते देखा

आदमी............................!