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मिन्नत


ख्वाहिशें खुशी की नहीं, ना मांग हैं मरहम देदोमिलो घाव ताज़ा करो, मुझको फिर से गम देदो

"मैं" मर गया है मेरे अंदर से, अब मुझे हम देदोकरो ज़ख्म नए फिर से, कलम को जरा सा दम देदो

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