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मरीज़-ए- इश्क़


सवाल हैं मेरे जहन में गर वक्त मिले तो जवाब दे देना,शामें जो काटी हैं कैद में मैने कभी उनका हिसाब दे देना,

तुम लगा न सके कभी मरहम मरीज़-ए-इश्क़ को,जीने के लिए कम से कम कुछ और याद दे देना......!!!

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