दर्द तू चाहे तमाम दे
मगर पलभर का आराम दे
पाक ये मुहब्बत है मेरी
न मेरी मुहब्बत का दाम दे
पी लू मैं ज़हर भी बिन पूछे
तू अगर अपने हाथों से जाम दे
मांगना बाकी ना रहा अब कुछ भी
तू मुझे बस अपना नाम दे ............


दर्द तू चाहे तमाम दे
मगर पलभर का आराम दे
पाक ये मुहब्बत है मेरी
न मेरी मुहब्बत का दाम दे
पी लू मैं ज़हर भी बिन पूछे
तू अगर अपने हाथों से जाम दे
मांगना बाकी ना रहा अब कुछ भी
तू मुझे बस अपना नाम दे ............