तुम

तुम 

अभी-अभी शांत हुई बारिश की

पत्तो पर रुकी बूँद हो

जो मन को अँजुरी भर सुख देती है।

तुम

अभी-अभी गुजरी हवा की ठण्डी 

सी बयार हो जो 

तन को छूकर पहाड़ भर सुख देती है।

तुम

अभी-अभी आई और गुम हुई 

चेहरे पर हंसी सी हो

जो मेरे तन-मन के सारे ख्वाबों का 

एकलौता हल देती है।


~ विनय सिंह