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गाँव शहर


हम गाँव के लोग शहरो मे फँस गए.. मजबूरियों के तलवे तले दबते चले गए.. हमे प्यार का एहसास था खुले असमान से. दो कमरों की ज़िन्दगी मे दबते चले गए..

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