अब युद्ध होगा, ऐसा होगा, फिर न कभी वैसा होगा।
संघर्ष की सीमा टूट चुकी, अब और सहन न होगा।
परिणाम चाहे जैसा भी हो, स्वीकार होगा,
युद्ध होगा, संग्राम होगा, सबकुछ होगा।
लेकिन विराम तो केवल परिणाम के बाद होगा।
हार गया तो फिर भी युद्ध होगा,
जीत गया तो विशुद्ध मन का जीवन होगा।
अब संघर्ष स्वीकार नहीं,
अब युद्ध के अलावा कुछ और नहीं।
