मैं सबसे अलग करना चाहता था,
आज मैं सबसे अलग हो गया हूं।
मैं सबसे कुछ अलग करना चाहता था,
आज एकांत के किसी तहखाने में पड़ा हूं।
जो मैं बनना चाहता था वो तो बना नहीं
जो मैं कभी नही बनना चाहता था
वो बनकर बैठा हूं,
अजीब सी बेचैनी हैं, सब कुछ छूट रहा है,
हाथ पर हाथ धरे देख रहा हूं ,
अब इस डर से कुछ नही कर रहा हूं,
कही फिर से ना ये इल्जाम का शिकार हो जाऊं... कुछ किया नहीं....