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कैसे होगा मिलन प्रिय

तुम हो शीश महल की रानी प्रिय मैं प्यादा जिसका कोई घर-बार नही तुम हो मखमल पर ख़्वाबों को सीने वाली हम तो सोने के भी हक़दार नही अब कैसे होगा मिलन प्रिय ? इसमें सम्भव यह प्यार नही। तुम हो बहता पानी दरिया का, मैं स्थिर जिसकी कोई धार नही तुम हो सुन्दर नोका प्रतिस्पर्धा की, मैं हुँ टूटी नाव जिसकी कोई पतवार नही अब कैसे होगा मिलन प्रिय ? इसमें सम्भव यह प्यार नही।
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