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दोस्ती और मोहब्बत

बात यह उन दिनों की है जब, दिल के जख्म भरे ही नहीं थे के एक खुशनुमा मोड़ आया मैंने सोचा अपना ले इसे शायद अब ये दर्द का कोई नया तोड़ आया कुछ खास हुआ था उस वक़्त मेरे साथ एक हसीं चेहरे से मुलाक़ात हुई थी मुलाक़ात तो एक तरफ़ा ही थी मगर उन्हें छोड़ कर हर किसी से उनकी बात हुई थी मैंने सोचा कुछ इस तरह गिरफ्तार हो जाऊं उसकी मोहब्बत में जैसे तारे अंधेरे के आगोश में होते हैं बना दूंगा अपने रिश्ते को इतना खूबसूरत जैसे गुलाब और भी खूबसूरत सुबह की ोस में होते है फिर ाहेशश हुआ के कही खो न जाये ये कोहिनूर तो इससे कोई रिस्ता और बनाया जाय मोहब्बत तो करलूँगा एकतरफा ही मगर क्यों न इसे एक  अच्छा दोस्त बनाया जाये किसी को  ार्ज कर सकूँ दास्ताँ-इ-दर्द कोई तो एक ऐसा हम दर्द बनाया जाय काफी असमंजस में था दिल और दिमा
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