गिरी है आज जो ये शाम जमाने भर से 
कल तक ये खुशगवार थी तेरे आने भर से 

तू जो गया तो वक्त गुजरता ही नहीं 
तू था तो ये उड़ता था बहाने भर से

वो ज़ख्म फिर से उभर के सामने आए 
जो भर गए थे तेरे हाथ लगाने भर से 

अब तो मुमकिन है बस एक ही इलाज मेरा 
तू आ जाए फकत मेरे बुलाने भर से 

तेरे बिना ये मेरा दिल गरीबखाना है
उम्र कटती नहीं है , नोट कमाने भर से ।।