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सहमति


मैं तुमसे ही तुम्हारी यातनाएं पूछ लूंगातुम सोच लेना कि तुम्हें कितना तड़पना है

अपनी ख्वाहिशों के ग़म तुम्हें मंजूर होंगेमेरी फितरत भी तड़पाने की है, मकबूल होगी ।।

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