वो भी मेरे दिल के कभी अंदर नहीं गया 
पर इसके लिए मैं कभी मंदिर नहीं गया 

ये झूठ है कि मैंने खो दिया है अपन को 
ये सच है मेरे दिल का कलंदर नहीं गया 

तुझे मिलना है तो मालूम है रस्ता मेरा 
नदियों से मिलने कभी समंदर नहीं गया 

सब जा रहे हैं हामियां भरने नवाब की 
तलवे चाटने को कोई सिकन्दर नहीं गया 

उसने चलाए खूब असलहे मेरी तरफ 
सीने के पार कोई भी खंजर नहीं गया 

उसने गुलाब तोड़ कर कुचल दिए मगर 
बावजूद भी ये बागवां बंजर नहीं गया 

मुझको अभी भी याद है वादों का फलसफा
आंखों से अब तलक भी वो मंजर नहीं गया ।।