ऐ इश्क तेरे वायदों का क्या करु बताइन वायदों से बस मुंतजिर ही रहा मैंखत्म ही नहीं हुआ मेरा सफ़र यूं उम्र भरमरते दम तक भी एक मुसाफिर ही रहा मैं
ऐ इश्क तेरे वायदों का क्या करु बताइन वायदों से बस मुंतजिर ही रहा मैं
खत्म ही नहीं हुआ मेरा सफ़र यूं उम्र भरमरते दम तक भी एक मुसाफिर ही रहा मैं