मैंने ख्वाब देखा है
तुम हमारे ख्वाबों में
रोज ही तो आती हो
मैंने तुमको देखा है
पर नजर के पर्दे से
अब मगर हकीकत में
सामने जो आई हो
बस यही गुजारिश है
जब मैं आंख खोलूं तो
सामने मेरे रहना
एक जनम के किस्से हैं
जो तुम्हें सुनाने हैं
कुछ कहानियां अगर
मैं बयां न कर पाऊं
तुम हमारी आंखों में
देखना समझ लेना
दूर की जो बातें हैं
पास में ही रख लेना
जो बची कहानी है
उसमें साथ रहना है
फिर कुछ नहीं मुझको
और तुमसे कहना है ।।
