जो भी मिला सफर में सब कबूल कर लिया
कुछ खास इंतजाम की मुराद भी नहीं
मुमकिन था ये कि मैं तुम्हें भुला न सकूंगा
मुमकिन ये हुआ है कि तुम अब याद भी नहीं
तेरे शहर का एक एक शख्स मिल गया
तूफा के बाद, पर मेरी बुनियाद भी नहीं ।।
जो भी मिला सफर में सब कबूल कर लिया
कुछ खास इंतजाम की मुराद भी नहीं
मुमकिन था ये कि मैं तुम्हें भुला न सकूंगा
मुमकिन ये हुआ है कि तुम अब याद भी नहीं
तेरे शहर का एक एक शख्स मिल गया
तूफा के बाद, पर मेरी बुनियाद भी नहीं ।।