मैं गरीब दुनिया को सारे किस्से सुना रहा हूं
तुम्हारा किस्सा मगर अभी तक बचा हुआ है
कि मुझको डर है कहीं जो इसको सुना दिया तो
तो मेरे हिस्से में कोई दौलत नहीं बचेगी
सभी उजालों को लूट लेंगे शहर वाले
तो मेरे हिस्से में कोई रौनक नहीं बचेगी
तुम्हारा किस्सा छिपे छुपाए
किसी किनारे में यूं दबाए,
सबकी आंखों से यूं बचाए
अपनी खातिर बचा लिया है
और गरीब दुनिया को बाकी किस्से सुना रहा हूं।।