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रूह की तलब


ऐसा भी कोई शख्स कभी-कभार मिलेकि जिसके होने से दिल काखोया हुआ सुकून-ओ-क़रार मिलेजिस्म को तो नोचती हैंबहुत सी आँखें यहाँजिसको रूह की तलब होकोई ऐसा तो कहीं एक यार मिले।

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