Poetry 1 min read 598.7K reads

विकार..


मनै पसंद है बेफिक्र बेपरवाहीतेरी परवाह का मोल ना लागैगा

झांझर झुमके जिसी रीझ तेरीमेरा गात इतना बोझ ना थामैगा

अना तो फेर तेरी भी घाट कोनीस्वाभिमान गैल तोल ना लागैगा

इब तो इस पै आती होगी हंसीबाद मं यो छो मखौल ना लागैगा

Read more Earn more Learn more