जहां किया दिल से किया
स्वार्थ का जाल बुना ही नहीं !
माना जो चाहा था
सब कुछ तो हुआ भी नहीं !
कुछ है जो सुना नहीं पाये 
मगर सब कुछ तो सुना भी नहीं !
कितना ही हो उसूली बंदा
बन सकता तो खुदा भी नहीं !
यादें नहीं इतनी बुरी भी वो
वक्त था लेकिन रुका ही नहीं !
चुनी जब आजादियाँ 
अपने आपको तो चुना ही नहीं..!!