अपनी लिखावट में गम लिए बैठे हो ...

होठो पर हंसी , आँखे नम लिए बैठो हो ..


बहार ख़ामोशी , 

अंदर तूफान लिए बैठो हो ....


जो शख्स कभी तुम्हरा था ही नहीं ,

अपनी खुशियां उसके नाम किये बैठे हो ...


उसकी एक मुस्कराहट के पीछे ,

अपनी जान लिए बैठे हो ...


उसकी झूठी मोहब्बत पर ,

 इतना घुमान लिए बैठो हो ....


जिस शख्स को तुम याद तक नहीं ,

अपनी हरेक गजल उसके नाम किये बैठे हो ....

✍️✍️--Harshita