सर झुका कर हार को ऐसे ना स्वीकार कर

प्रहार कर

चोट लगी जो तुझे 

तो बैठ कर ना चीत्कार कर 

प्रहार कर

माना एक ठोकर लगी अभी तुझे

बैठा पड़ा है अब भी तू

 उस दर्द को लिए

सब भाग रहे अभी

तू उठने को तैयार नहीं

प्रहार कर

बैठा है तू इस तरह

जैसे सब हार कर पड़ा

सब है तेरे पास सब को कर नजरअंदाज

तू बैठकर क्या सोचता?

तू उठ चल तैयार हो

ले गहरी सांस

और भागने को तैयार हो

अपनी किस्मत का रोना, रोना छोड़ कर 

दर्द सारे समेट कर

सारी शक्ति बटोर कर

अपनी बेड़ियों पर

प्रहार कर

हां, ज़ोरदार प्रहार कर...

तू निकल तुझे नया सवेरा मिलेगा,

तू निकल तुझे सब खोया मिलेगा, 

मुस्कुराता, इंतजार करता हर चेहरा मिलेगा,

रास्ते में फिर कोई बैठा मिलेगा,

सब कुछ हार कर,

उससे भी कहना यही बार - बार

प्रहार कर, प्रहार कर, प्रहार कर...