कुछ तेरी नादानी से कुछ तेरी मनमानी से है लिखा ये अपना जीवन कुछ तेरी कुछ मेरी कहानी से पूछती हैं आखें अब रोने की वजह तू बता क्या कहू इन नज़रों के पानी से चाहू लाख चलना आज़ाद होकर आज़ाद होकर बेफिक्र होकर लेकिन चाहता नहीं हटना तेरी निगरानी से राह मुश्किल तो मुश्किल ही सही कदम जटिल तो जटिल ही सही जो हो इशारा तेरी नज़रों का मुक़म्मल होगा सफ़र बड़ी आसानी से।


