तन्हाई , रुस्वाई , हैं कई परछाई, 

सूना जीवन, और अंगड़ाई , 

कर लिया इसे आबाद फिर से , 

कर लिया फिक्र से सौदा


भटक भटक के ना भटके , 

उलझ उलझ के ना उलझे, 

ये कैसी है कसमकश , 

या है ये फिक्र से सौदा


ज़िन्दगी तो यूँ ही कटेगी , 

चिंताएं हटाने से ही हटेंगी, 

पर खुशियों के पार देखो तुम, 

और नदियों की धार देखो तुम , 

बस कर लो फिक्र से सौदा