उफ! परीक्षा देने का समय

जब बहुत लंबा हुआ,

देख के प्रश्न की पुस्तिका

मन को अचंभा हुआ।


दिल में बसी थी घबराहट

पैदा हुई डर की आहट,

जो भी आया रट के

थोड़े नहीं भूले भटके।।


देखा मैंने दाएं बाएं

लेकिन कुछ नजर ना आए,

मुझको कुछ समझ ना आए

देख के प्रश्न अक्ल चकराए।।


करा प्रश्न आधा अधूरा

बाकी खाली पेपर पूरा,

हालत मेरी हो गई बुरी

अध्यापिका की नजर मुझ पर पूरी।।


परीक्षा में लोहे के चने चबाना

सारा दिमाग इसी में लड़ाया,

फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाए

मुश्किल से कुछ प्रश्न कर पाए।।


उड़ गया था चेहरे का रंग

मैं हो रहा था दंग,

जैसे लड़ रहा कोई जंग

भगवान भी ना मेरे संग।।


सोचा मैंने किया समय बर्बाद

नहीं था तब मैं सचेत,

पर अब पछताए होत क्या

जब चिड़िया चुग गई खेत।।