घनघोर अंधेरी रात हुई
चोर से मुलाकात हुई,
उसके हाथ में चाकू था
लगता खड़क सिंह डाकू था।
मांगा उसने पैसा कैश,
वरना करो स्वर्ग में ऐश।
जब में था मेरे दस रुपया
मैंने बोला यह ले लो भैया
बोल मत दे मुझको तू भीख
अभी देता हूं तुझको सिख।
गुस्से से झल्ला कर बोला
उतार कपड़े, चैन, घड़ी,
मैंने सोचा आई मुझ पर
यह आफत तो बहुत बड़ी।
उतार दिए मैंने कपड़े चेन
कहा मैंने अब खत्म हुई देन,
उसने कहा मुझे, ए छोकरे
आगे से रखियो जेब में रोकड़े।
