
भूख जब लगती है
अंग अंग खाने को तरसता
ठंड जब लगती है
छत के बिना शरीर ठिठुरता।।
अमीरों के काम करने के लिए
यह तो मजबूर है,
दो वक्त का खाना खाता
यह तो मजदूर है।।
काम आता है दूसरों के
देश को यही है बनाता,
हर आंधी तूफान बरसात में
भी निडर काम करता जाता।।
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