मैं बेटी सयानी , बन गई हूं बहु रानी

कोई बनी है मेरी जेठानी ,

तो किसी की बन गई हूं मैं देवरानी।


बाबूजी का सपना पूरा हो गया है,

पर उनका घर अब अधूरा हो गया है।

उस घर की मैं बेटी नहीं बेटा थी,

लाडली थी और सबकी चहेता थी।


उस आंगन में मैं खेली थी,

उस आंगन का काम संभाला था।

बाबूजी, मां और भाई मेरे

मेरी जिंदगी का पाठशाला था।


छोड़ चुकी अब मैं वह आंगन,

आ गई ससुराल अपने पति के द्वारे।

हुई विदाई सबके अखियन भीगे,

राह देखें फिर सब आंख पसारे।


बाबूजी तुम दुखी मत होना,

मैं भी खुशहाल रहूंगी।

आधी जिंदगी मैंने मायके बिताई,

और बाकी अब ससुराल रहूंगी।


तुमने जो सीख दी है मुझे,

मरते दम तक निभाऊंगी।

कह दिया भगवान से मैंने

अगले जन्म,

फिर तेरी बेटी बनकर आऊंगी।