मां तू कहां है?, तू कहां है मां?

जब से तू गई है तुझे ढूंढता फिर रहा हूं,

देख पैरों पर खड़ा हूं, अपने पर तुझ बिन लड़खड़ा के गिर रहा हूं।


चेहरे पर मुस्कान, आंखों में आंसू आज भी रहता है,

जब यह जमाना मुझे काबिल कहता है,

क्योंकि ख्याल उस वक्त मेरे जहन में तेरा रहता है।


नादान था मैं, तेरे दूध का कर्ज चुकाने चला था

मैं मूर्ख, मुझे इतना भी ना पता इसमें मेरा क्या भला था?

एहसास ना था, मां के दूध के एक बूंद ने यह सृष्टि रची है,

मां तू तो त्रिकालदर्शी है, तेरे बिना क्या यह सृष्टि बची है।


वह हंसकर बोली,

अरे पागल, मुझे खुशी तब होगी; जब तू अपनी जिंदगी सुधरेगा,

इतना बड़ा हो गया क्या तू, तू दूध का कर्ज़ उतारेगा।


हां मां, तेरे लिए वह सब करूंगा जो तूने बचपन से किया,

मेरे लिए जो तूने घुट घुट के जिया।

निकल पड़ा कमाने उसे छोड़ कर अकेले, बोला तेरी खुशी वापस लाऊंगा

मैं मूरख, मुझे क्या पता अपने साथ मैं उसकी खुशी भी ले जाऊंगा।


जा रहा था मैं बाहर खड़ी वह देख रही अपनी नम निगाहों से

भोर से शाम हो गई पर उसकी नजर ना हटी उन राहों से।


वक्त बीता,

मैं लग गया पैसा जुटाने में और भूल गया

वह अकेली है वहां इस भीड़ जमाने में।

भूल गया था मेरी सांसे तुझी से चल रही है

एहसास ना रहा कि, तेरी उम्र भी ढल रही है।


पैसा लेकर घर गया, बोला, यह ले मां बचपन से अब तक का पूरा हिसाब है,

यकीन नहीं तो जोड़ ले, सामने पड़ी वह किताब है।


मां थोड़ी उदास हुई और बोली,

तुझे मैंने सिर्फ जन्म नहीं, यह जिंदगी भी दिया है

9 महीने तुझे कोख में रखा है, उसके लिए मैंने जहर भी पिया है।

बीमार रहता था जब तू ,तेरे बगल में सोई हूं

तेरे चोट लगने पर बेटा मैं भी रोई हूं।

बहुत शैतानी की है तूने, बहुत सताया है

तेरा पेट भरा रहा क्योंकि तूने मेरा हिस्सा भी खाया है।


तब समझ आया तूने कितने कष्ट सहे हैं,

ऐसी बातें और हालात जो मोती है, पर अनकहे हैं।

पैसा तो बस जीने का एक जरिया है,

मां तेरा कर्ज मैं क्या उतारूंगा, तेरा प्यार तो ममता का दरिया है।