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था और हूं


ख्वाबों की मासूमियत छीन उन्हें हल्का कर दिया हैकल्पनओं के पंखों पर ख्वाहिशें रख उन्हें भारी कर दिया है।

कल तक खुद को तुम में एक बंद किताब सा समेट रखा थाआज तुम्हे खोकर खुद को अख़बार सा जारी कर दिया है।

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