भूख के डेरे,मज़हब के फेरे
मिट्टी के रोग बड़े हैं
मंदिर के मालिक,मस्ज़िद के साहिब
क्यों इंसान बिखरें पड़े हैं
सिक्कों की खनखन,रिश़्तो की अनबन
गाठों मे उलझे हैं सारे
कच्चें है वादे, किस्मत के धागे
जीते कोई कैसे हारे।


भूख के डेरे,मज़हब के फेरे
मिट्टी के रोग बड़े हैं
मंदिर के मालिक,मस्ज़िद के साहिब
क्यों इंसान बिखरें पड़े हैं
सिक्कों की खनखन,रिश़्तो की अनबन
गाठों मे उलझे हैं सारे
कच्चें है वादे, किस्मत के धागे
जीते कोई कैसे हारे।