इतने शिकवे हैं तेरे शहर मेएक दूसरे के बीच बड़ी दीवारें हैंबस दो कश लेते ही यहांमैं मक़बरा बन जाता हूं।
इतने शिकवे हैं तेरे शहर मेएक दूसरे के बीच बड़ी दीवारें हैं
बस दो कश लेते ही यहांमैं मक़बरा बन जाता हूं।