रात की सिलवटों मे 

रौशनी के दाने हैं

सितारे छानकर अब

जुगनू बनाने हैं

खिड़कियों पर गाढ़ा अंधेरा घना है

टिमटिमाते ख्वाबों के झालर लगाने हैं।