चांद पर इश्क़ चल सरेआम करेंगे
पैर जमीन को टिकेंगे ही नहीं
तो क्या जुदा हमें अली और राम करेंगे।
चेहरे का नकाब, मन की बंदिशे, पैरों की बेड़ियां
सब यहीं रहने दे
थोड़ी सी बस आखों में तैरती गुलाबी हया रख ले
जिसमे सुबह शाम डूबने का काम करेंगे
पैर जमीन को टिकेंगे ही नहीं
तो क्या जुदा हमें अली और राम करेंगे।
